पंच धूणी तपस्या की परिक्रमा से होती है मनोकामनाएं पूरी: महंत ओगड़ पीर तुलसी नाथ



अभिषेक पूर्णिमा/रामपाल मलिक

पिहोवा, 21 मई : हिंदू धर्म और साधु-संतों की परंपरा में की जाने वाली सबसे कठिन साधनाओं में से पंच धूणी तपस्या सबसे कठीन मानी जाती है, जो इन दिनों गांव सारसा के मुर्तजापुर रोड़ पर पीर बाबा की समाधि के नजदीक महंत ओगड़ पीर तुलसी नाथ द्वारा की जा रही है, महंत द्वारा कड़ी धूप में 43 से 45 डिग्री तापमान में उपलो से बने पवित्र अग्नि के पांच कुंडो के बीच बैठकर ध्यान किया जा रहा हैं, जो आंतरिक शुद्धि, अनुशासन और भूतकाल के कर्मों और अहंकार के नाश का प्रतीक है।

                         तपस्या में बैठने से पूर्व तपस्वी महंत ओगड़ पीर तुलसी नाथ ने बताया कि यह तपस्या विश्व कल्याण, सांसारिक मोह-माया से मुक्ति, समाज में सुख-समृद्धि, क्षेत्र में खुशहाली तथा विश्व में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने कहा कि तपस्या की परिक्रमा करने से मानव की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है तथा मात्र दर्शन से ही पुण्य की प्राप्ति होती है। 

                      सेवादार जितेंद्र फोजी ने बताया कि महंत ओगड पीर तुलसी नाथ द्वारा व्रत रखकर यह कठोर तपस्या 21 दिन लगातार की जाएगी, गांव से प्रतिदिन श्रद्धालु तपस्या स्थल पर पहुंचकर आस्था व्यक्त करते हुए तपस्या स्थल की परिक्रमा करके पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। 

                      पूरे परिसर में मंत्रोच्चारण, भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। सेवको द्वारा तपस्या स्थल पर   श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं, ताकि भीषण गर्मी के कारण किसी को कोई असुविधा न हो। इस धार्मिक आयोजन को लेकर गांव में भारी उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है तथा लोग इसे अपने जीवन में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत मान रहे हैं। इस अवसर पर नफे सिंह, शमशेर सिंह, कर्मवीर सिंह, शीशपाल, बजीर सिंह, रामचंद्र, सेवा सिंह, सुभाष चन्द्र सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।


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