हरियाणा के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में शिक्षकों-कर्मचारियों का आंदोलन शुरू


वेतन संकट, HRA विसंगति और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर प्रदेशभर में बढ़ा आक्रोश


राजेश वर्मा। कुरुक्षेत्र भूमि 
चंडीगढ़/हरियाणा, 15 मई

हरियाणा के सरकारी सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं गैर-शैक्षिक कर्मचारियों का लंबे समय से चला आ रहा असंतोष अब आंदोलन का रूप लेने लगा है। नियमित वेतन भुगतान, मकान किराया भत्ता (HRA), ग्रेच्युटी, महिला कर्मचारियों के अधिकारों तथा अन्य लंबित समस्याओं को लेकर कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (CTA) ने प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।

एसोसिएशन ने हरियाणा के सभी सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की प्रबंधन समितियों एवं प्राचार्यों को पत्र लिखकर राज्य सरकार के समक्ष कर्मचारियों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने की अपील की है। साथ ही, कर्मचारियों के समर्थन में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शनों को नैतिक सहयोग देने का भी अनुरोध किया गया है।

एसोसिएशन के प्रधान डॉ. सुदीप कुमार ने कहा कि सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी पिछले कई वर्षों से लगातार उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

सात सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष तेज

एसोसिएशन द्वारा जारी मांग पत्र में सात प्रमुख मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है—

पिछले लगभग दो माह से लंबित वेतन का नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा वेतन सीधे ट्रेज़री के माध्यम से जारी किया जाए।

सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के अनुसार HRA दिया जाए, क्योंकि वर्तमान में उन्हें अभी भी छठे वेतन आयोग के आधार पर भत्ता मिल रहा है।

कर्मचारियों के लिए समुचित मेडिकल सुविधा एवं स्वास्थ्य योजना लागू की जाए।

महिला कर्मचारियों के लिए 25 कैजुअल लीव तथा चाइल्ड केयर लीव (CCL) की सुविधा तुरंत लागू की जाए।

एक्स-ग्रेशिया पॉलिसी 2019 को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

लीव रूल्स 2002 एवं सर्विस रूल्स 2006 में समयानुसार संशोधन किए जाएं।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ प्रदान किया जाए।


“अब चुप रहने का समय नहीं”

डॉ. सुदीप कुमार ने कहा कि सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के कर्मचारी लगातार धैर्य और संयम के साथ अपनी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाते रहे हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा तथा विद्यार्थियों के हितों एवं महाविद्यालयों के शैक्षणिक वातावरण को यथासंभव प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

प्रबंधन समितियों से सहयोग की अपील

एसोसिएशन ने प्रबंधन समितियों और महाविद्यालय प्रशासन से अपील की है कि वे कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों के समर्थन में सरकार के समक्ष सकारात्मक एवं प्रभावी पक्ष रखें। पत्र में कहा गया है कि प्रबंधन समितियाँ सदैव संस्थानों के विकास और कर्मचारियों के हितों की संरक्षक रही हैं तथा इस कठिन समय में कर्मचारियों को उनके सहयोग की अपेक्षा है।

प्रदेशभर में बढ़ रहा समर्थन

सूत्रों के अनुसार हरियाणा के विभिन्न जिलों के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में शिक्षक एवं कर्मचारी आंदोलन को लेकर लगातार बैठकें कर रहे हैं और व्यापक स्तर पर समर्थन जुटाया जा रहा है। वेतन में लगातार हो रही देरी और सुविधाओं के अभाव ने कर्मचारियों में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है।

हालांकि अभी तक सरकार अथवा अधिकांश प्रबंधन समितियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कई संस्थानों में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा शुरू हो चुकी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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