अभिषेक पूर्णिमा
पिहोवा, 23 मार्च हिंदू धर्म में नवरात्रि को आस्था श्रद्धा और भक्ति का महापर्व माना जाता है। जिसे लेकर देश व प्रदेश के देवी मंदिरों व पंडालों में चैत्र नवरात्रि महोत्सव बड़ी धूमधाम के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। नवरात्रि में नारी शक्ति का महत्व देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों के माध्यम से महिलाओं के असीम सामर्थ्य, साहस, और समर्पण की पूजा और सम्मान करना है। यह पर्व दर्शाता है कि नारी केवल श्रद्धा नहीं, बल्कि शक्ति, सृजन और परिवर्तन की आधारशिला है, जिनका सम्मान राष्ट्र की प्रगति और आत्मनिर्भरता के लिए अनिवार्य है। यह त्यौहार समाज को महिलाओं के प्रति भेदभाव और हिंसा को समाप्त करने और उन्हें पुरुष के समान अधिकार और अवसर प्रदान करने के लिए प्रेरित करता है। नवरात्रि पर्व को लेकर महिलाओं एवं गणमान्यजनों ने अपने अपने विचार व्यक्त किए जो इस प्रकार है।
हर क्षेत्र में अग्रणी है महिलाएंः डाॅ. उषा जांगडा
उषा फिजियोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर कैथल की प्रमुख फिजियोथेरेपिस्ट विषषेज्ञ डाॅ. उषा जांगडा का कहना है कि आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन, राजनीति और खेल सहित अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। उनके समर्पण, मेहनत और संघर्ष के बल पर देश निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हो रहा है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा कर लोग नारी शक्ति को प्रणाम करते हैं अत समाज में भी महिलाओं के प्रति हमें अपनी सोच बदलने की जरूरत है।विदेशों में भी देश का नाम रोशन कर रही है महिलाएंः मीना
नगर की प्रसिद्ध जैसलीन ब्यूटी एंड मेकओवर स्टूडियो की प्रमुख मीना रानी का कहना है कि चैत्र नवरात्रि के अवसर पर जहां देशभर में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जा रही है, वहीं यह पर्व नारी शक्ति के सम्मान और उनके योगदान को याद करने का भी संदेश देता है। आज भारतीय महिलाएं न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपने हुनर, परिश्रम और प्रतिभा के दम पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं। उनकी उपलब्धियां न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सोच को भी सकारात्मक दिशा दे रही हैं।
नारी सम्मान को स्थापित करना ही सच्ची नवरात्रि पूजा: प्रदीप सैनी
सैनसन्स पेपर मिल के एमडी ने कहा कि नवरात्रि पर्व केवल धार्मिक आस्था और पूजा अर्चना तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असली संदेश समाज में नारी के सम्मान और उसकी महत्ता को स्थापित करना है। मां दुर्गा की विभिन्न शक्तियों की आराधना के माध्यम से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि जिस समाज में नारी का आदर नहीं होता, वहां धर्म और संस्कृति की सार्थकता अधूरी रहती है।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रमोद एवं सुरेश भार्गव ने कहा कि नवरात्रि में माता की पूजा से मन को शांति और आत्मबल मिलता है। अगर हम नवरात्रि में देवी की पूजा करते हैं, तो हमें समाज की हर महिला को भी वही सम्मान देना चाहिए। तभी नवरात्रि की पूजा सार्थक हो सकती है।