हरियाणा के एडेड कॉलेजों में वेतन विलंब और अन्य समस्याओं को लेकर शिक्षकों का आक्रोश, धरने की चेतावनी

राजेश वर्मा। कुरुक्षेत्र भूमि
कुरुक्षेत्र,

हरियाणा के सभी सरकारी सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं गैर-शैक्षिक कर्मचारियों ने लंबे समय से लंबित समस्याओं को लेकर प्रबंधन समितियों और प्राचार्यों के समक्ष सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की मांग की है। कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. सुदीप कुमार ने सभी प्राचार्यों एवं प्रबंध निकायों को पत्र भेजकर इन मुद्दों पर सरकार के समक्ष प्रभावी पक्ष रखने का आग्रह किया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारी शांतिपूर्ण धरने पर बैठने को विवश होंगे।

प्रमुख समस्याएं:

1. वेतन भुगतान में देरी: पिछले लगभग दो माह से शिक्षकों एवं कर्मचारियों का वेतन लंबित है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है।
2. मकान किराया भत्ता (HRA) में भेदभाव: एडेड कॉलेजों में अभी भी छठे वेतन आयोग के अनुसार HRA दिया जा रहा है, जबकि राज्य के अन्य विभागों, बोर्डों एवं निगमों में सातवें वेतनमान के तहत HRA मिल रहा है।
3. चिकित्सा सुविधा का अभाव: एडेड कॉलेजों के कर्मचारियों के लिए कोई उचित मेडिकल स्कीम या सुविधा लागू नहीं है।
4. महिला कर्मचारियों के अधिकार: महिलाओं को कैजुअल लीव बढ़ाकर 25 दिन करने का निर्णय अभी तक लागू नहीं हुआ। चाइल्ड केयर लीव (CCL) का लाभ भी नहीं दिया जा रहा।
5. एक्स-ग्रेशिया पॉलिसी 2019: यह नीति अब तक लागू नहीं की गई है।
6. लीव एवं सर्विस नियमों में संशोधन की कमी: लीव रूल्स 2002 और सर्विस रूल्स 2006 में समयानुसार आवश्यक संशोधन नहीं किए गए हैं।

डॉ. सुदीप कुमार ने पत्र में कहा कि इन अन्यायपूर्ण स्थितियों के कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष है तथा उनका आर्थिक और मानसिक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने प्रबंधन समितियों एवं महाविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि वे हरियाणा सरकार के समक्ष कर्मचारियों के हित में सकारात्मक एवं प्रभावी पक्ष रखें।

चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो सभी शिक्षक एवं कर्मचारी महाविद्यालयों में शांतिपूर्ण धरना देने को बाध्य होंगे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों की पढ़ाई एवं कॉलेज के नियमित कार्य पर अनावश्यक प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

गौरतलब है कि पत्र सभी सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों को भेज दिया गया है ताकि संबंधित पदाधिकारी समस्याओं की गंभीरता से अवगत हो सकें। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार इन मांगों पर क्या पहल करती है, अन्यथा आने वाले दिनों में शिक्षक-कर्मचारी आंदोलन की मुद्रा में आ सकते हैं।

3 Comments

  1. Nice coverage sir

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  2. Government is requested to solve our problems

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  3. Very shameful, as teacher are waiting their salary. Government and bureaucratic mindsets are responsible for the same. I am wondering why Government focused on India to become Vishav Guru, as they are mental and financially bankrupt...

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