वेतन की भिखारिन बनी हरियाणा के एडेड कॉलेजों की शिक्षक बिरादरी

वेतन की भिखारिन बनी हरियाणा के एडेड कॉलेजों की शिक्षक बिरादरी
दो माह से खाली जेब, ट्रेजरी प्रणाली की मांग को लेकर सरकार पर बरसे शिक्षक

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राजेश वर्मा। कुरुक्षेत्र भूमि

कुरुक्षेत्र,


हरियाणा के सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों के शिक्षक इन दिनों आर्थिक संकट की ऐसी मार झेल रहे हैं, जहाँ ज्ञान बाँटने वाले खुद अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रदेश के करीब 96 एडेड कॉलेजों के शिक्षकों को पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है। यह समस्या कोई नई नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था की विफलता का परिणाम है, जो हर दो-तीन महीने बाद शिक्षकों को आर्थिक असुरक्षा के दलदल में धकेल देती है।
“हर बार वेतन के लिए संघर्ष करना पड़ता है” : डॉ. सुदीप कुमार
कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. सुदीप कुमार ने इस स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल वेतन में देरी नहीं, बल्कि शिक्षकों की गरिमा पर चोट है। उन्होंने कहा कि हर दो-तीन महीने में शिक्षकों को अपने अधिकार के लिए आवाज उठानी पड़ती है, जो किसी भी लोकतांत्रिक और सभ्य समाज के लिए शर्मनाक स्थिति है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब शिक्षक समुदाय चुप नहीं बैठेगा और सरकार से स्थायी समाधान की मांग को लेकर संघर्ष तेज किया जाएगा।
मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और एसीएस को भेजा गया स्मारक
शिक्षक नेतृत्व ने हरियाणा के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री तथा उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अपूर्वा कुमार सिंह को स्मारक भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
शिक्षकों की मुख्य मांग है कि उनके वेतन भुगतान को ट्रेजरी प्रणाली के अंतर्गत लाया जाए, ताकि वेतन समय पर और पारदर्शी तरीके से जारी हो सके।
स्मारक में कहा गया है कि प्रदेश के अन्य सरकारी कर्मचारियों को तय समय पर वेतन मिल जाता है, लेकिन एडेड कॉलेजों के शिक्षकों के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि एक ही राज्य में कर्मचारियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था अन्यायपूर्ण है।
परिवारों पर भी गहराया संकट
दो माह से वेतन न मिलने के कारण शिक्षकों के परिवार आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। बच्चों की फीस, घर का खर्च, बैंक की किश्तें और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
शिक्षकों का कहना है कि आर्थिक तनाव का असर उनकी कार्यक्षमता और कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।
आंदोलन की चेतावनी
शिक्षक संगठनों ने सरकार को साफ संकेत दे दिए हैं कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग को स्वीकार कर उनकी आर्थिक असुरक्षा खत्म करेगी, या फिर यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़े संघर्ष का रूप लेगा।

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