फ्लेक्स के साए में सरस्वती चौक: मेले से पहले मेकओवर या पोस्टरों का महोत्सव


राजेश वर्मा। कुरुक्षेत्र भूमि
पिहोवा,

पिहोवा में नगर पालिका द्वारा बड़े उत्साह से बनाया गया सरस्वती चौक इन दिनों अपनी भव्यता से ज्यादा फ्लेक्स बोर्डों के बोझ के कारण चर्चा में है। चौक का ढांचा तो खड़ा है, पर उसकी असली पहचान रंग-रोगन से नहीं बल्कि चारों ओर लटकते विज्ञापन बैनरों से हो रही है—मानो सरस्वती माता नहीं, बल्कि “एडवर्टाइजमेंट देवी” विराजमान हों। ऊपर लहराते झंडे, चारों तरफ झुके हुए फ्लेक्स और बीच में खड़ा अनपेंटेड ढांचा यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर यह चौक है या अस्थायी होर्डिंग स्टैंड?

तीन दिवसीय प्रसिद्ध चैत्र चौदस मेला सिर पर है, लेकिन चौक पर अब तक रंग की एक परत भी नहीं चढ़ी। लगता है नगर पालिका ने सोचा होगा कि जब फ्लेक्स इतने रंग-बिरंगे हैं तो पेंट की क्या जरूरत! शायद योजना यह हो कि मेले में आने वाले श्रद्धालु चौक की सुंदरता नहीं, बल्कि बैंक और आयोजकों के विज्ञापन देखकर ही आध्यात्मिक संतोष प्राप्त कर लें।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो अगली बार चौक का नाम ही “फ्लेक्स चौक” रख दिया जाए। नगर पालिका को रंग और ब्रश से ज्यादा रस्सी और टेप की जरूरत पड़ रही है, क्योंकि चौक की असली सजावट तो पोस्टरों से ही हो रही है।

अब देखना यह है कि मेले से पहले नगर पालिका नींद से जागकर इन अवैध बोर्डों को हटवाती है या फिर चौक यूँ ही विज्ञापनों की चादर ओढ़े मेले का स्वागत करेगा। जनता की मांग साफ है—चौक की भव्यता लौटाई जाए, फ्लेक्स हटाए जाएं और नियमों का उल्लंघन करने वाले आयोजकों पर जुर्माना लगाया जाए, ताकि सरस्वती चौक फिर से चौक जैसा दिखे, होर्डिंग स्टैंड जैसा नहीं।

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