महामंडलेश्वर सुश्री स्वामी विद्या गिरी महाराज व श्रीमहंत बंसी पुरी महाराज ने मंडप प्रवेश का पूजन कर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि माता गायत्री की पूजा-अर्चना एवं महायज्ञ मानव कल्याण का सबसे श्रेष्ठ माध्यम हैं। भारतीय ऋषि-मुनियों द्वारा स्थापित यज्ञ परंपरा आज भी समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जनकल्याण और विश्व शांति का संदेश देने वाला आध्यात्मिक अभियान है। यज्ञ से वातावरण में शुद्धता आती है और लोगों के मन में सेवा, त्याग एवं मानवता की भावना जागृत होती है। माता गायत्री को वेदों की जननी कहा गया है और उनकी आराधना से व्यक्ति को ज्ञान, बुद्धि और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती अशांति और नैतिक पतन को रोकने के लिए धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देना आवश्यक है। 31 मई सोमवार को सप्त दिवसीय गायत्री महायज्ञ का पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ समापन होगा।
इस अवसर पर मां पीतांबरा पीठ बगलामुखी धाम के महंत भीमपुरी, स्वामी महेश पुरी, महंत लक्ष्मी नारायण पुरी, स्वामी धीरज पुरी, स्वामी लखन पुरी, महंत जगन्नाथ पुरी, महंत सर्वेश्वरी गिरी, महंत सत्यानंद पुरी,स्वामी विजय पुरी,स्वामी माधव पुरी, स्वामी आशुतोष पुरी व विपिन काहड़ा, बलराम शर्मा, राजेश गोयल, बारु राम बंसल, सुशील गुप्ता सहित अनेक गण्यमान्य लोग मौजूद थे।
