आंदोलन जारी, लेकिन छात्रहित सर्वोपरि—शिक्षकों ने परीक्षाएँ प्रभावित न करने का लिया निर्णय

राजेश वर्मा। 
हरियाणा,
हरियाणा प्रदेश के सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर काले बिल्ले लगाकर आंदोलन जारी रखा है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के बावजूद विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षाओं को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं किया जाएगा। इसी भावना के तहत सभी कर्मचारियों ने परीक्षा संबंधी कार्य पूरी जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ संपन्न करने का निर्णय लिया है।
कर्मचारी 7वें वेतन आयोग के अनुसार संशोधित मकान किराया भत्ता (HRA) दिए जाने तथा महिला कर्मचारियों के लिए 25 कैजुअल अवकाश की अधिसूचना जारी करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन सरकार द्वारा अब तक इन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
कर्मचारियों ने यह भी निर्णय लिया है कि आगामी रणनीति तय करने के लिए राज्य स्तरीय समन्वय ऑनलाइन बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के सभी शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, ताकि आगे की संयुक्त कार्ययोजना पर सहमति बनाई जा सके।
बैठक में समन्वय संघर्ष समिति के गठन पर भी विचार किया जाएगा, जिसमें शिक्षण एवं गैर-शिक्षण दोनों वर्गों तथा सभी कर्मचारी संगठनों का प्रतिनिधित्व होगा। प्रस्तावित समिति भविष्य में आंदोलन को संगठित और दिशा देने का कार्य करेगी।
प्रदेश में वर्तमान में 96 सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालय संचालित हैं, जिनमें लगभग 2361 शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी कार्यरत हैं। वर्ष 1974 से अब तक सभी वेतन आयोगों के अंतर्गत ऐडेड कॉलेज कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर मकान किराया भत्ता मिलता रहा है, लेकिन 7वें वेतन आयोग के अंतर्गत यह लाभ अब तक प्रदान नहीं किया गया है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 से राज्य सरकार ने अपने सभी विभागों में संशोधित HRA लागू कर दिया था, लेकिन सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। HRA से संबंधित फाइल लंबे समय से शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के बीच लंबित बताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार सरकार द्वारा HRA देने के लिए आवश्यक वित्तीय आकलन पहले ही किया जा चुका है, जिसमें अतिरिक्त मासिक व्यय लगभग ₹1,10,31,307 आंका गया है, इसके बावजूद अब तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
इसी प्रकार महिला कर्मचारियों के हित में मुख्यमंत्री द्वारा कैजुअल अवकाश 20 से बढ़ाकर 25 दिन करने की घोषणा की गई थी। इस संबंध में शिक्षा विभाग द्वारा फाइल चलाकर शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री की स्वीकृति भी प्राप्त कर ली गई थी, लेकिन अब तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
कर्मचारियों और शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे पिछले लगभग दस वर्षों से अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। सभी ने सरकार से शीघ्र निर्णय लेने और लंबित फाइलों को स्वीकृति प्रदान करने की एकजुट मांग की है।

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