फूंक मार कर बजाने वाले साज जैसे बांसुरी को बजाना एक चुनौती पीयूष संगीत अध्यापिका, अमातिर महिला गुरुकुल, गांवड़ी
पिहोवा, 29 मई (अभिषेक पूर्णिमा): हरियाणा कला परिषद् तथा जीओ गीता गुरुकुल के सहयोग से आज बांसुरी वादन कार्यशाला के 19 वें दिन मुख्य अतिथि गुलजारी लाल नंदा स्मारक की मुखिया प्रो डॉ शुचि स्मिता तथा अमातिर विद्यालय की संगीत अध्यापिका पीयूष जी विशिष्ट अतिथि के रूप से उपस्थित रहीं। सरस्वती वंदना के पश्चात भगवद्गीता के स्वरूप के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में संगीत से तथा अपने गूढ़ संगीत ज्ञान से प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया उन्होंने कहा कि यदि हम अच्छा संगीत सुनेंगे तो अच्छा गाएंगे और अच्छा गाएंगे तो अच्छा बजाएंगे भी उन्होंने कहा कि संगीत से हमारे जीवन में अनेक सकारात्मक परिवर्तन आते हैं लक्ष्य केंद्रित होता है एकाग्रता बढ़ती है मन शांत होता है तथा मानसिक तनाव भी काम होता है हम किसी भी विषय की पढ़ाई कर रहे हो और साथ में कुछ समय यदि हम संगीत साधना को भी दें तो उस विषय में भी हमारी उन्नति होती है विशिष्ट अतिथि संगीत अध्यापिका श्रीमती पीयूष मिश्रा जी ने प्रतिभागियों को संगीत की बारीकियों से अवगत कराया तथा चार प्रकार के वाद्य यंत्रों के विषय में जानकारी दी उन्होंने सितार वादन कर "श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी" भजन सभी भजन बजाकर सभी को आनंद विभोर किया उपस्थित सभी जनों में उत्साह भर दिया । कार्यशाला के मार्गदर्शक डॉक्टर विवेक कोहली जी ने आए हुए मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर उन्हें सम्मानित किया तथा डॉ सचिंद्र कुमार जी ने उपस्थित सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया और मुख्य प्रशिक्षक डॉ मनीश कुकरेजा ने भी मुख्य अतिथि तथा विशेष अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन किया । गीता ज्ञान संस्थानम के पुस्तकालय अध्यक्ष आचार्य श्री वेद प्रकाश मिश्रा जी तथा निनाद मुनि व कार्यशाला के सह प्रशिक्षक श्री पवन गुम्बर भी उपस्थित रहे तथा उन्होंने संस्थान की तरफ से आए हुए अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ कर के किया गया।
