राजेश वर्मा। कुरुक्षेत्र भूमि
हरियाणा,
सातवें वेतन आयोग लागू हुए सात साल बीत चुके हैं, लेकिन हरियाणा के सहायता प्राप्त (एडेड) कॉलेजों में कार्यरत हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ स्पष्ट भेदभाव जारी है। जबकि सरकारी कॉलेजों के कर्मचारियों को 1 अगस्त 2019 से संशोधित मकान किराया भत्ता (HRA) का लाभ मिल रहा है, एडेड कॉलेजों के कर्मचारी आज भी छठे वेतन आयोग के पुराने, अपर्याप्त HRA पर मजबूर हैं। यह न केवल आर्थिक अन्याय है, बल्कि शिक्षा क्षेत्र के प्रति सरकार की उदासीनता का जीता-जागता प्रमाण है।
कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (हरियाणा) के प्रधान डॉ. सुदीप कुमार ने इस मुद्दे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “यह सीधा भेदभाव है। क्या एडेड कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों से कम योग्य हैं? क्या उनका किराया कम लगता है? क्या उनकी जिम्मेदारी कम है? जब सरकारी कर्मचारी 2019 से संशोधित HRA ले रहे हैं, तो एडेड कॉलेजों के कर्मचारियों को क्यों वंचित रखा जा रहा है?”
लालफीताशाही का शिकार प्रस्ताव
एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और उच्चतर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कई बार मुलाकात की। प्रस्ताव मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद वित्त विभाग भेजा गया था, लेकिन वित्त विभाग बार-बार अनावश्यक आपत्तियां उठाकर फाइल लौटा रहा है। डॉ. सुदीप कुमार ने इसे “ लालफीताशाही” करार दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी नई वेतन वृद्धि या अतिरिक्त आर्थिक बोझ का मामला नहीं है। यह मात्र मौजूदा HRA को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप संशोधित करने का प्रश्न है, जो पहले के सभी वेतन आयोगों में हमेशा किया जाता रहा है।
1974 से चली आ रही समानता अब टूट गई
एडेड कॉलेजों के कर्मचारी वर्ष 1974 से पूर्ववर्ती वेतन आयोगों के अनुसार HRA प्राप्त करते आ रहे हैं। हर बार सरकारी कर्मचारियों के समकक्ष संशोधन किया गया। लेकिन सातवें वेतन आयोग में अचानक यह विषमता क्यों? एसोसिएशन पूछता है — क्या एडेड कॉलेज सरकारी शिक्षा प्रणाली का हिस्सा नहीं हैं?
चिंताजनक स्टाफ शॉर्टेज: शिक्षा व्यवस्था पर संकट
जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के एडेड कॉलेजों की स्थिति बेहद चिंताजनक है:
- कुल ऑपरेटिंग कॉलेज: 96
- कुल छात्र: लगभग 1.30 लाख
स्टाफ की स्थिति:
- प्रिंसिपल: 96 स्वीकृत पदों में से केवल 41 भरे, 56 पद खाली (लगभग 57-58% कमी)
- टीचिंग स्टाफ (असिस्टेंट प्रोफेसर/टीचर्स): 2,831 स्वीकृत पदों में से मात्र 1,437 भरे, 1,394 पद खाली (49% कमी)
- नॉन-टीचिंग स्टाफ: 1,668 स्वीकृत पदों में से 883 भरे, 785 पद खाली (47% कमी)
कुल स्टाफ शॉर्टेज: 2,235 पद खाली (कुल स्वीकृत 4,596 पदों में 48-49% कमी)।
जिला-वार एडेड कॉलेज:
- अंबाला: 10
- यमुनानगर: 8
- भिवानी: 8
- सोनीपत: 8
- कैथल: 7, कुरुक्षेत्र: 7
- पानीपत: 5, हिसार: 5
- और कई जिले 1 से 6 तक।
ऐसी भारी कमी के बीच शिक्षक-कर्मचारी पहले से ही अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। फिर भी उन्हें उनके हक का HRA नहीं दिया जा रहा।
एसोसिएशन की मांग और चेतावनी
कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन ने सरकार से तुरंत मांग की है कि एडेड कॉलेजों के सभी कर्मचारियों (शिक्षक और नॉन-टीचिंग) को 1 अगस्त 2019 से सातवें वेतन आयोग के अनुसार संशोधित HRA का लाभ दिया जाए।
डॉ. सुदीप कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द संज्ञान नहीं लेती, तो शिक्षा क्षेत्र में असंतोष और बढ़ेगा। हजारों शिक्षक-कर्मचारी निराश हो रहे हैं। यह न केवल उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की क्षमता को भी कमजोर कर रहा है।”
सरकार को सोचना होगा
हरियाणा सरकार को अब फैसला करना होगा — क्या वह एडेड कॉलेजों को शिक्षा का अभिन्न अंग मानती है या नहीं? 1.30 लाख छात्रों की शिक्षा और हजारों कर्मचारियों के हक का सवाल है। लालफीताशाही और भेदभाव अब और नहीं चल सकता।
अब जरूरत है कि मुख्यमंत्री श्री नायब सैनी और शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा इस अन्याय को तुरंत दूर करे।
Tags
Haryana