भागवत कथा में गूंजे सनातन संस्कृति और धर्म के दिव्य प्रसंग


पिहोवा, 30 मई (अभिषेक पूर्णिमा):
स्थानीय श्री गोबिदानंद आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में 13वें दिन कथा वाचक महंत सर्वेश्वरी गिरी ने विभिन्न पौराणिक एवं आध्यात्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, त्याग और लोककल्याण का संदेश दिया।

         उन्होंने  कथा के दौरान राजा सगर की कथा, मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण, भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन चरित्र, चंद्रवंश की गौरवगाथा, समुद्र मंथन, राजा बलि की दानशीलता तथा भगवान वामन अवतार के दिव्य प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।

          महंत सर्वेश्वरी गिरी ने कहा कि राजा सगर की कथा भारतीय संस्कृति में तप, त्याग और सत्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उनके वंशजों द्वारा किए गए महान प्रयासों के फलस्वरूप मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ, जिससे असंख्य प्राणियों का कल्याण संभव हुआ।

        उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श राजा के रूप में समस्त मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। रामायण के प्रसंग हमें सिखाते हैं कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।

        समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्नों का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रसंग सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियों के संतुलन का भी संदेश देता है।

           राजा बलि और भगवान वामन अवतार का वर्णन करते हुए बताया गया कि राजा बलि दान, वचनबद्धता और समर्पण के अद्वितीय प्रतीक थे। भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर तीन पग भूमि का दान मांगा और अपने विराट स्वरूप से सम्पूर्ण सृष्टि को नाप लिया। इससे हमें सीख मिलती है कि ईश्वर के समक्ष सांसारिक वैभव और अहंकार का कोई महत्व नहीं है।

     व्यासपीठ से उन्होंने  श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इन दिव्य प्रसंगों को केवल सुनें ही नहीं, बल्कि अपने जीवन में भी उतारें। धर्म, सत्य, सेवा, करुणा और परोपकार के मार्ग पर चलकर ही मानव जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में आरती  कर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।


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