श्याम सुंदर गोस्वामी एवं राजकुमार गोस्वामी परिवार के सौजन्य से श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुई प्रभात फेरी


अभिषेक पूर्णिमा 
 

गुरुद्वारा रोड पर श्रद्धा व भक्ति के साथ संपन्न हुई प्रभात फेरी

- स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने गुप्त नवरात्रि, नाम-स्मरण और प्रभु भक्ति का दिया प्रेरक संदेश

पिहोवा। महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं प्रेरणा से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के अंतर्गत आयोजित प्रभात फेरियों की श्रृंखला में आज की प्रभात फेरी गुरुद्वारा रोड पर श्याम सुंदर गोस्वामी एवं राजकुमार गोस्वामी परिवार के सौजन्य से श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुई।

                विधिवत पूजन-अर्चन के उपरांत भजन-संकीर्तन का शुभारंभ हुआ। भजन गायक जगदीश तनेजा, सुरेश वर्मा, हर्षिका तनेजा, काका ग्रोवर, राजेंद्र शर्मा, कुश चुचरेजा, दिनेश अत्री, हरिकेश सैनी, राज धवन, जितेंद्र वर्मा, अमित खुराना, सुनील वत्स, अंजू गोस्वामी सहित अन्य भजन गायकों ने एक से बढ़कर एक सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

              इसके उपरांत महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी प्रवचनों में कहा कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा आध्यात्मिक साधना का विशेष पर्व है और इसके साथ ही शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होता है। उन्होंने कहा कि साधक के लिए यह समय आत्मचिंतन, नाम-स्मरण और प्रभु भक्ति में लीन होने का श्रेष्ठ अवसर है। भगवान की कृपा तभी प्राप्त होती है जब दिन की शुरुआत प्रभु के नाम, ध्यान और सत्संग से हो।

                         महाराज श्री ने रामचरितमानस के सुंदरकांड का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुँचे तो उन्हें चारों ओर राक्षसी प्रवृत्तियाँ ही दिखाई दीं। तभी विभीषण के मुख से निकला "राम-राम" का पावन उच्चारण सुनकर उन्हें विश्वास हुआ कि इस नगरी में भी सज्जनता जीवित है। उन्होंने कहा कि प्रभु का नाम ही सच्चे भक्त की पहचान है। जिस हृदय में राम-नाम और कृष्ण-भक्ति का स्मरण बस जाता है, वहाँ भगवान स्वयं अपना मार्ग बना देते हैं।

                     उन्होंने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी साधना प्रभु का निरंतर स्मरण है। यदि प्रातःकाल उठते ही हाथ जुड़ जाएँ, मन प्रभु के चरणों में लग जाए और वाणी से ईश्वर का नाम निकले, तो समझ लेना चाहिए कि भगवान की विशेष कृपा प्राप्त हो रही है। नाम-स्मरण ही मनुष्य के जीवन को पवित्र, सफल और आनंदमय बनाता है।

                         प्रवचन के उपरांत महाराज श्री ने वेद प्रकाश गोस्वामी एवं समस्त गोस्वामी परिवार को स्मृति-चिह्न स्वरूप ठाकुर जी का दिव्य स्वरूप भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह पावन स्मृति सदैव इस आध्यात्मिक आयोजन की मधुर याद दिलाती रहेगी।

                      इस अवसर पर तेजेंद्र वालिया, प्रेमपाल पुरी, कृपाल सैनी, राजकुमार गोस्वामी, नरेश ग्रोवर, अनिल गोस्वामी, बंटी गोस्वामी, हैप्पी चोपड़ा, महेश तलवार, मनोहर शर्मा, शिवचरण बहल, महेंद्र गर्ग, दीपक बवेजा, डॉ. जसवीर सिंह, डॉ. अमित अरोड़ा, डॉ. सुदर्शन चुघ, हरीश वाधवा, परमानंद तनेजा, प्रेम थरेजा, दविंदर भल्ला, मदन चावला, वीरेंद्र अरोड़ा, प्रकाश वर्मा, नरोत्तम वासन, राजू चड्डा, कुलदीप चावला, ऋषिपाल, वीरेंद्र पाहुजा, रजवंत सिंह सचदेवा, सूरज प्रकाश तनेजा, श्याम सुंदर बहल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

                       अंत में आयोजक गोस्वामी परिवार ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया तथा प्रसाद वितरित किया। पूरे वातावरण में "राधे-राधे" और "जय श्रीकृष्ण" के जयघोष गूंजते रहे।

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