पिहोवा, 29 अप्रैल। हल्के के गांव संधौला निवासी तिलकराज ने मानव सेवा की एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती जा रही है। उन्होंने एक या दो बार नहीं, बल्कि अब तक 55 बार रक्तदान कर समाज के सामने सेवा, समर्पण और जागरूकता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। तिलक राज केवल एक आम नागरिक नहीं हैं, बल्कि वे उन लोगों में शामिल हैं जो हर किसी की जान बचाने के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। जैसे ही उन्हें कहीं भी रक्त की आवश्यकता की सूचना मिलती है, वे बिना देर किए मौके पर पहुंच जाते हैं। समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े होने के कारण वे एक फोन कॉल पर ही रक्तदान के लिए तत्पर रहते हैं।
समाज में अक्सर यह भ्रांति देखने को मिलती है कि रक्तदान करने से शरीर में खून की कमी हो जाती है या स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। लेकिन तिलक राज जैसे जागरूक नागरिक इस गलतफहमी को दूर करते हुए बताते हैं कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है और शरीर कुछ ही समय में रक्त की कमी को स्वयं पूरा कर लेता है। यही कारण है कि वे निडर होकर नियमित रूप से रक्तदान करते हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। हाल ही में, अग्रवाल धर्मशाला में इस्हाक के एक परिवार द्वारा उनके भाई स्वर्गीय संदीप शर्मा की पुण्य स्मृति में आयोजित रक्तदान शिविर में तिलकराज ने 55वीं बार रक्तदान किया। जैसे ही उन्हें इस शिविर की जानकारी मिली, वे तुरंत वहां पहुंच गए और अपनी सेवा भावना का परिचय दिया।
तिलकराज का मानना है कि “रक्तदान सबसे बड़ा दान है, क्योंकि इससे सीधे किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है।” उनकी यही सोच उन्हें समाज में एक अलग पहचान दिला रही है। आज जरूरत है कि अधिक से अधिक लोग तिलकराज जैसे समाजसेवियों से प्रेरणा लें और रक्तदान जैसे नेक कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। यदि हर व्यक्ति साल में एक बार भी रक्तदान करे, तो देश में किसी को भी खून की कमी के कारण अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी। तिलकराज की यह यात्रा न केवल सराहनीय है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सच्ची सेवा वही है, जो बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों के लिए की जाए। बता दे कि तिलकराज एक निजी स्कूल में अध्यापक के पद पर कार्यरत है और एक किसान भी है।
सन् 1990 में पहली बार दिया था अपने पिता को खून, तब से जागा जनून
तिलक राज के पिता के पिता जब सन् 1990 करनाल के हस्पताल में दाखिल हुए और खून की जरूरत पड़ी तब उन्होंने पहली बार खून दिया जिससे उनका खून दान करने का जनून जागा। खून दान के लिए उनके पारिवारिक सदस्यों ने उन्हें बहुत बार रोका की तुम्हें किसी प्रकार की दिक्कत आ जाएगी लेकिन उन्होंने इन सभी बातों से ऊपर उठकर रक्तदान करने से फिर वे पीछे नहीं हटे जो आज तक जारी है।
फोटो संख्या
कैंप के दौरान रक्तदान करते तिलकराज संधौला एवं उनकी पर्सनेलिटी फोटो।