पाकिस्तान में 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब के भवन को नुकसान पहुंचाने से संगत में रोष, दोषियों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई : हरपाल सिंह


सिख संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की मांग, पाकिस्तान पर दबाव बनाकर अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करे सरकार

अभिषेक पूर्णिमा/पिहोवा 

हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के निदेशक  सरदार हरपाल सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के फारूकाबाद चुहरकाना में 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब पर बुलडोजर चलाकर गुरुद्वारा साहिब के भवन को नुकसान पहुंचाने की घटना से पूरी दुनियां की सिख संगत में रोष है। संगत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पुरजोर मांग करती है कि पाकिस्तान पर दबाव बनाकर इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के हित सुरक्षित नहीं हैं। धार्मिक उन्माद फैलाकर सिखों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। जो सहन नहीं होगा। 

                      उन्होंने बताया कि 125 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब का इतिहास पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी से जुड़ा हुआ है। इसका निर्माण 1901 में सिंह सभा आंदोलन के दौरान हुआ था। 

                लाहौर से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित यह धार्मिक स्थल सिख समुदाय की आस्था और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि घटना के बाद पूरी दुनिया के सिख संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाए जाने की घटना की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और पाकिस्तान में स्थित अल्पसंख्यकों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

                          हरपाल सिंह ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब की सुरक्षा करने में वहां के प्रशासन और सरकार ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसी बहुत सी घटनाएं सामने आ चुकी हैं । जिनमें पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों के स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। 

                   ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 सीएए प्रस्तुत किया था। जिसका उद्देश्य पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन पारसी आदि समुदायों को भारत में शरण और नागरिकता का सरल मार्ग उपलब्ध कराना था । 

                  उन्होंने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि मामले में हस्तक्षेप करते हुए पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाया जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए गुरुद्वारा साहिब के खंडित भवन का पुनर्निर्माण करवाया जाए।

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