अभिषेक पूर्णिमा
पिहोवा। समाज में बढ़ती बुराइयों और कुरीतियों पर चिंता जताते हुए धर्मनगरी की समाजसेवी महिलाओं ने कहा कि सकारात्मक सोच, अच्छे संस्कार और बेहतर व्यवहार ही एक स्वस्थ व संस्कारित समाज की नींव हैं। प्रस्तुत है इस विषय पर उनकी राय।
रचनात्मक सोच से ही होगा संस्कारी समाज का निर्माण : नीलिमा चक्रपाणि
समाजसेविका नीलिमा चक्रपाणि ने कहा कि नकारात्मक सोच समाज में बुराइयों और कुरीतियों को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक सोच, अच्छे विचार और संस्कार अपनाकर ही सुदृढ़ एवं खुशहाल समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से स्वार्थ छोड़कर सदैव अच्छे विचार अपनाने और समाजहित में कार्य करने का आह्वान किया।
अच्छे संस्कारों से बनता है श्रेष्ठ व्यक्तित्व : डॉ. तान्या चुघ
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. तान्या चुघ ने कहा कि व्यक्ति के विचारों का समाज पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कार, नैतिक शिक्षा और भारतीय जीवन मूल्य ही श्रेष्ठ व्यक्तित्व की नींव हैं। आज बच्चे अपनी संस्कृति और संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बचपन से ही सही शिक्षा और अच्छे संस्कार दिए जाएं, ताकि उनमें अच्छे विचार विकसित हों और वे समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
प्रभु स्मरण और सत्संग से समाज में आएगा बदलाव : मीना पूर्णिमा
ब्यूटी ब्राइडल मेकअप आर्टिस्ट मीना पूर्णिमा(जैसलीन पूर्णिमा ब्यूटी एंड मेकओवर)की संचालिका ने कहा कि व्यक्ति के अच्छे विचारों का प्रभाव दूसरों पर भी पड़ता है, जिससे समाज में धीरे-धीरे बदलाव आता है। उन्होंने कहा कि नकारात्मक सोच घृणा और वैमनस्य को जन्म देती है। इसलिए समाज में प्रेम, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए प्रभु स्मरण, सत्संग और गुरुजनों की संगति को अपनाना आवश्यक है।
महिलाओं की सक्रिय भागीदार भी जरूरी: डा. प्रियंका मंगला
हृदय रोग विशेषज्ञ एवं समाजसेविका डॉ. प्रियंका मंगला ने कहा कि समाज में बढ़ती बुराइयों पर अंकुश लगाने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला परिवार की प्रथम शिक्षिका होती है, जो बच्चों में अच्छे संस्कार, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की नींव रखती है। यदि महिलाएं परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का समर्पित भाव से निर्वहन करें, तो एक स्वस्थ, संस्कारित और जागरूक समाज का निर्माण संभव है।
अच्छी सोच से तन-मन रहता है स्वस्थ: सुमन बंसल
सनातन सेवा महिला मंडल की सक्रिय सदस्य सुमन बंसल ने कहा कि अच्छी सोच व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखती है। उन्होंने कहा कि अच्छे विचार रखने वाला व्यक्ति गलत कार्यों से दूर रहता है, जबकि तनाव और चिंता का माहौल व्यक्ति को गलत सोच की ओर ले जाता है। इसलिए स्वस्थ और सुखद जीवन के लिए तनावमुक्त वातावरण बनाए रखना आवश्यक है।
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