एसडीएम अनिल कुमार दून ने किया चैत्र चौदस मेले 2026 का शुभारंभ, 19 मार्च तक देश विदेश के श्रद्धालु पहुंचेंगे तीर्थ नगरी पिहोवा में, श्रद्धालुओं के लिए किए गए है मेले में पुख्ता इंतजाम,सीसीटीवी कैमरों से रखी जाएगी नजर
अभिषेक पूर्णिमा/राजेश वर्मा
पिहोवा, 16 मार्च। मेला प्रशासक एवं उपमंडल अधिकारी नागरिक अनिल कुमार दून ने कहा कि पिहोवा चैत्र चौदस मेले में देश के कोने कोने से श्रद्धालु पहुंचते है और यह मेला हिन्दू सिख एकता का प्रतीक भी माना जाता है। इस मेले में पंजाब राज्य से सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंचते है। इस मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए है।एसडीएम अनिल कुमार दून सोमवार को पिहोवा सरस्वती तीर्थ पर प्रशासन द्वारा बाल भवन में बनाएं गए चैत्र चौदस मेले के सूचना केन्द्र का उद्घाटन करने के उपरांत पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इससे पहले एसडीएम अनिल कुमार दून, डीएसपी निर्मल सिंह, नगरपालिका सचिव अशोक कुमार ने मंत्रोच्चारण के बीच विधिवत रूप से सूचना केन्द्र का शुभारंभ किया और इसके साथ ही चार दिवसीय चैत्र चौदस मेले का भी आगाज हुआ। उन्होंने कहा कि विश्व विख्यात चैत्र चौदस मेले का धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है। कुरुक्षेत्र की परीधि में पडऩे वाले तीर्थों में सर्वाधिक महत्व पृथुदक तीर्थ का माना गया है। वामन पुराण के अनुसार वेन के पुत्र पृथु के नाम से इस तीर्थ का नाम पृथुदक हुआ। राजा वेन धर्म से विमुख हो गया था, जिस कारण ऋषियों ने उसे श्राप देकर मार दिया था। फिर उसके शरीर का मंथन किया गया, जिससे भगवान विष्णु के नौवें अंश पृथु पैदा हुए। राजा पृथु ने जिस स्थान पर अपने पितरों को उदक यानी जल दिया, वह स्थान पृथु-उदक यानी पृथुदक नाम से प्रसिद्ध हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तीर्थ में स्नान का अति महत्व माना गया है। यहां स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते है तथा व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ की फल की प्राप्ति के साथ-साथ स्वर्गलोक भी प्राप्त हो जाता है।
एसडीएम अनिल कुमार दून ने कहा कि चैत्र-चौदस मेला में विभिन्न राज्यों के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मेले में आते हैं तथा परंपरागत तरीके से अमावस के समय स्नान करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए मेला प्रशासन द्वारा सभी प्रकार की व्यवस्था की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरों द्वारा हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इसके अतिरिक्त भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इस चैत्र चौदस मेले में सूचना प्रसारण केंद्र स्थापित किया गया है जिसके माध्यम से मेले में गुम हुए लोगों को मिलाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पुराणों के अनुसार पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्ध में मारे गए अपने सगे संबंधियों का यहीं पर पिंड दान करवाया था। भगवान श्रीकृष्ण और शिव ने भी यहां सरस्वती तीर्थ में स्नान किया। श्री गुरु नानक देव जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी भी यहां पधारे थे। महाराजा रणजीत सिंह इसी पावन तीर्थ पर अपनी माता का पिंडदान करवाने आए थे। इस पावन तीर्थ पर पूरा वर्ष श्रद्धालु पिंडदान व स्नान करने के लिए आते रहते हैं, लेकिन चैत्र चौदस को यहां स्नान करने का विशेष महत्व है। इस मौके पर डीएसपी निर्मल सिंह, उमाकांत शास्त्री, अधीक्षक हाकम सिंह,सभी पत्रकार एवं छायाकार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।




