लोक कला दर्पण द्वारा आयोजित हिंदी पत्रकारिता दिवस की पूर्व संध्या पर 30 नन्हे बांसुरी वादकों ने बांसुरी वादन से प्रस्तुत किया राष्ट्रीय गान
हरियाणा कला परिषद् एवं जीओ गीता गुरुकुल द्वारा आयोजित 20 दिवसीय बांसुरी वादन कार्यशाला का हुआ विधिवत समापन
संगीत के माध्यम से पंचकोशों को पुष्ट करने की साधना संभव: सुधीर कुमार, प्रबंधक, विद्या भारती
मेरू खण्ड विधि से सरगमों को विकसित करने की युक्ति से जब अभ्यास करेंगे तो निश्चित ही स्वरों का ज्ञान होगा
डा अशोक कुमार, विभागाध्यक्ष, संगीत एवं नृत्य विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय
अभिषेक पूर्णिमा,देव पूर्णिमा
चंडीगढ़/पिहोवा, 30 मई। हरियाणा कला परिषद् एवं जीओ गीता गुरुकुल के सहयोग से आयोजित 20 दिवसीय कार्यशाला का विधिवत समापन हो गया । गीता मनीषी परमपूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी ने सभी प्रभागियों को अगली प्रातः प्रमाण पत्र वितरित कर आशीर्वाद दिया। इस कार्यशाला में विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ अशोक शर्मा, विभागाध्यक्ष संगीत एवं नृत्य विभाग तथा सुधीर कुमार जी प्रबंधक विद्या भारती रहे। भगवत गीता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर तथा पुष्प अर्पित एवं माँ सरस्वती की अराधना कर कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। पुस्तकालय अध्यक्ष वेद मिश्रा जी द्वारा 20 दिवसों की विस्तृत रिपोर्ट पी पी टी के माध्यम से प्रस्तुत की गई। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में प्रतिदिन किसी न किसी विद्वत जन के द्वारा प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया गया।
बांसुरी वादन प्रशिक्षक डॉ मनीश कुकरेजा के बांसुरी गुरु उस्ताद डॉ मुजतबा हुसैन ने भेजे गए वीडियो संदेश में सभी को साधुवाद दिया तथा सुंदर कार्यशाला में सभी सहयोग देने वाले अधिकारियों, प्रशिक्षकों, विशिष्ट अतिथियों व प्रतिभागियों व उनके अभिभावकों को आशीर्वाद देते हुए शुभ कामनाएं दी। उन्होंने बांसुरी संगीत के माध्यम से प्रेम का संदेश विश्व में फैलाने का आवाह्न किया। मुख्य प्रशिक्षक डॉ मनीश कुकरेजा द्वारा सभी प्रतिभागियों को संकल्प दिलाया गया कि बांसुरी का नियमित अभ्यास करने,गुरु जनों का सम्मान करने तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति अटूट श्रद्धा रखने का। अपने संबोधन में विशिष्ट अतिथि सुधीर कुमार ने संगीत के द्वारा किस प्रकार पांच कोशों यथा अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय व आनंदमय कोशों को पुष्ट किया जा सकता है पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक डॉ मनीश कुकरेजा को उनके इस पवित्र कार्य हेतु कोटि कोटि बधाई दी व सभी प्रतिभागियों को नियमित अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया। अन्य विशिष्ट अतिथि डॉ अशोक शर्मा ने
अपने उद्बोधन में इस सुंदर कार्यशाला को संचालित करने में महती भूमिका निभाने वाले अधिकारियों, प्रतिभाओं व विशेष रूप से मुख्य प्रशिक्षक को हृदय से शुभकामनाएं ज्ञापित की व कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं से प्रतिभाओं का विकास होता है। उन्होंने सुंदर भजन "ना मै जानू आरती वंदन ना पूजा की रीत
मै अनजानी दरस दीवानी पागल मेरी प्रीत" के माध्यम से गुरु के महत्त्व पर प्रकाश डाला। मेरखंड विधि से किस प्रकार वे अपने को सृजित कर सुरों का ज्ञान अर्जित कर सकतें हैं इसके बारे में युक्ति बताई । कार्यक्रम के अंत में सह प्रशिक्षक पवन गुंबर ने अभिभूत होकर गीता ज्ञान संस्थान के प्रतिनिधि के तौर पर सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया ।उन्होंने बताया कि एक दिन पूर्व लोक कला दर्पण द्वारा आयोजित विश्व पत्रकारिता दिवस की पूर्व संध्या के कार्यक्रम जो कि 29 मई शुक्रवार को विद्या भारती परिसर स्थित रंगशाला में हुआ जिसमें संगीत से जुड़ी लगभग 21 संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे के समक्ष 30 बांसुरी वादन कार्यशाला के प्रतिभागियों ने राष्ट्र गान को बांसुरी वादन के माध्यम से प्रस्तुत कर सभी को आत्मविभोर कर दिया। कार्यक्रम का समापन अतिथियों को स्मृति चिन्ह देने, बांसुरी वादन कर सामूहिक राष्ट्रीय गान बजाने व शांतिपाठ कर तथा प्रसाद वितरित करके किया गया।
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