होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि हमारी आस्था, विश्वास और आंतरिक शुद्धि का पर्व : स्वामी ज्ञानानंद महाराज

पूर्णमासी एवं होली के पावन अवसर पर विशाल भजन संध्या एवं भंडारे का आयोजन

अभिषेक पूर्णिमा 

पिहोवा, 3 मार्च :पूर्णमासी की पावन रात्रि एवं होली के शुभ अवसर पर श्री कृष्ण कृपा मंदिर में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में, नरोत्तम वासन के सहयोग से एक विशाल भजन संध्या एवं भंडारे का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भक्ति रस में सराबोर हुए।

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में होली एवं पूर्णमासी के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि हमारी आस्था, विश्वास और आंतरिक शुद्धि का पर्व है।

महाराज श्री ने भक्त प्रह्लाद एवं हिरण्यकश्यप की कथा का उल्लेख करते हुए समझाया कि अहंकार का अंत निश्चित है, जबकि भक्ति और विश्वास अमर हैं। उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जहां “मैं” और “मेरा” का भाव बढ़ता है, वहां एक-एक कर सभी बुराइयाँ जीवन में प्रवेश करने लगती हैं — ईर्ष्या, कपट, द्वेष और क्रोध उसी के रूप हैं।

उन्होंने सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि होली पर रंग चढ़ते और उतरते हैं, परंतु यदि प्रभु प्रेम का रंग जीवन पर चढ़ जाए तो वह कभी नहीं उतरता। अहंकार का रंग क्षणिक है, लेकिन भक्ति का रंग स्थायी है।

महाराज श्री ने रावण और विभीषण का उदाहरण देते हुए कहा कि अहंकार अंततः विनाश का कारण बनता है, जबकि प्रभु के प्रति समर्पण और प्रेम व्यक्ति को अमर बना देता है।

उन्होंने संतों की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा 

मीरा बाई ने जीवन को चुनरिया मानकर प्रभु प्रेम का रंग मांगा।

कबीर ने “चदरिया झीनी रे झीनी” के माध्यम से जीवन को प्रभु नाम के रंग में रंगने की बात कही।

सूरदास ने भी जीवन को प्रभु भक्ति के रंग से सजाने का संदेश दिया।

गुरु नानक देव जी ने गुरबाणी में प्रेम और नाम के रंग को जीवन का सच्चा श्रृंगार बताया।

स्वामी जी ने कहा कि होली का पर्व सद्भाव, प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने आह्वान किया कि हम सब मिलकर अपने जीवन से अहंकार के रंग को उतारें और प्रभु प्रेम, सद्भावना एवं सेवा के रंग को स्थायी रूप से धारण करें।कार्यक्रम के अंत में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और आनंदमय रहा। इस अवसर पर राजकुमार वासन,  अश्विनी वासन, विनोद कपूर, प्रेमपाल पुरी, तेजिंदर वालिया, गोल्डी खैरा, आशीष चक्रपाणि, डॉ अवनीत वड़ैच, नवीन गर्ग, मनोज शर्मा, डॉ सुदर्शन चुघ, डॉ अमित अरोड़ा, तेजेंद्र सिंह गोल्डी, दीपक बवेजा, दीपक पुंडरी, मानिक पुंडरी, राजकुमार गोस्वामी, शिवचरण बहल, मनोहर लाल शर्मा, श्रवण मंगला, विकास चावला, विजय डंग, कृपाल सैनी, संतराम गर्ग, अजय कालड़ा, राहुल अरोड़ा, नंदलाल सिंगला, विपिन काहड़ा, रजनी बेरी, सुरेंद्र चोपड़ा, राजीव थरेजा, अश्विनी तलवार, योगेश गुप्ता, दिनेश तिवारी, अशोक गुलाटी, डॉ जसवीर सिंह, वेद प्रकाश पोपली सहित नगर के अनेक गणमान्य जन्म उपस्थित थे।

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