अभिषेक पूर्णिमा
पिहोवा, 27 फरवरी भारतीय संस्कृति का प्रमुख और रंगों से सराबोर त्यौहार होली भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। होली पर लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगा मिठाइयां आदि खिलाकर खुशियां बांटते है। रंगो के इस महापर्व की तैयारियों को लेकर बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है। इस दौरान हमें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी सख्त जरूरत है। इससे बचाव के लिए जानते हैं नगर के कुछ बुद्धिजीवी लोगों की राय ÷
पानी का करें बचाव: आशीष चक्रपाणि
तीर्थ पुरोहित एवं नपा अध्यक्ष आशीष चक्रपाणि ने कहा कि आमतौर पर रंगों से खेले जाने वाले होली के त्योहार पर लोग पानी का खूब इस्तेमाल करते हैं जिससे काफी मात्रा में पानी बर्बाद होता है। उन्होंने जल संरक्षण की महत्वता पर जोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक रंगों से ही होली खेले तथा अनावश्यक पानी का प्रयोग न करें।
दिलों को जोड़ने का उत्सव है होली: पंडित प्रमोद कुमार ज्योतिषी
पंडित प्रमोद कुमार ज्योतिषी ने कहा कि कि होली का पर्व आपसी भाईचारे, सौहार्द व पारस्परिक प्रेम का प्रतीक है। होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का पर्व है। यह त्योहार हमें एक-दूसरे के गिले-शिकवे भूलाकर प्रेम और अपनत्व का भाव बढ़ाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने आह्वान किया कि वे हुड़दंग, नशा और जबरदस्ती रंग लगाने जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहकर कानून व्यवस्था का सम्मान करें।
मिलावटी रंगों से स्वास्थ्य का करें बचाव: डॉ. सुदर्शन चुघ
सरस्वती मिशन हॉस्पिटल के एम.डी. डॉ. सुदर्शन चुघ का कहना है कि बाजारों में बिकने वाले रंगों मे कई प्रकार के रासायनिक तत्व मिले होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। अत: ऐसे रंगो से स्वास्थ्य का बचाव रखें। होली खुशियों और उल्लास का पर्व है। थोड़ी सी सावधानी बरत कर इसे सुरक्षित बनाया जा सकता है।
आखों का करें बचाव: डॉ. विक्रम ठाकुर
होली पर कृत्रिम और रासायनिक रंगों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विक्रम ठाकुर ने बताया कि होली के दौरान आंखों में रंग या गुलाल चले जाने से एलर्जी, जलन, संक्रमण और कॉर्निया पर खरोंच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि आंखों में रंग चला जाए तो उन्हें रगड़ना नहीं चाहिए। साफ और ठंडे पानी से तुरंत आंखों को धोना चाहिए। यदि जलन या दर्द बना रहे तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श करें।
रूखी न रखें त्वचा : डॉ. आर. पी. मान
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. पी. मान का कहना है कि खुले में बिकने वाले व सस्ते कई रंगों में हानिकारक रसायन मिले होते हैं, जो त्वचा पर एलर्जी, खुजली, जलन, और सूजन जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। उन्होंने सलाह दी है कि होली खेलने से पहले शरीर पर सरसों या नारियल का तेल लगा लें, जिससे रंग सीधे त्वचा के संपर्क में न आए। यदि रंग खेलने के बाद त्वचा पर अत्यधिक जलन, सूजन या एलर्जी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करें।
