पारंपरिक भोजन न केवल बेहतर स्वास्थ्य बल्कि त्वचा की सेहत के लिए भी लाभकारी: डॉ. आर.पी. मान


अभिषेक पूर्णिमा

विलुप्त हो रही पारंपरिक भोजन की परंपरा को लेकर चिकित्सकों ने जताई चिंता

पिहोवा।  आधुनिक जीवनशैली और फास्ट फूड के बढ़ते चलन से बच्चों से लेकर बड़ों तक का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। जंक फूड के अधिक सेवन से मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार का महत्व और जंक फूड से बचाव के उपायों पर प्रस्तुत है नगर की प्रमुख महिला चिकित्सकों की राय।

पारंपरिक भोजन त्वचा की सेहत के लिए लाभकारी: डॉ. आर.पी. मान

कैथल के स्किन स्पेशलिस्ट डॉ. आर.पी. मान ने कहा कि विलुप्त हो रही पारंपरिक भोजन की परंपरा चिंता का विषय है और इसे बचाने के लिए लोगों को फिर से स्थानीय व पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अपनाना चाहिए। उनका मानना है कि पारंपरिक भोजन न केवल बेहतर स्वास्थ्य बल्कि त्वचा की सेहत के लिए भी लाभकारी है।

विलुप्त हो रही पारंपरिक भोजन की परंपरा: डा.विभा चुघ 

           सरस्वती मिशन हस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. विभा चुघ ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली के चलते पारंपरिक भोजन की परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। इसकी जगह फास्ट फूड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थ तेजी से ले रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हैं। घर का ताजा, स्वच्छ और संतुलित भोजन ही अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक भोजन शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करता है और कई बीमारियों से बचाने में सहायक होता है। डॉ. चुघ ने कहा कि बच्चे जंक फूड की ओर जल्दी आकर्षित होते हैं, इसलिए अभिभावकों को उनके खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पारंपरिक व्यंजनों को बच्चों की पसंद के अनुसार आकर्षक ढंग से तैयार किया जाए, ताकि उनमें स्वस्थ भोजन की आदत विकसित हो।

बंद पैकेट जंक फूड सेहत के लिए नुकसानदायक : डा. कुलजीत कौर

        श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय में होम्योपैथी एक्सपर्ट डॉ. कुलजीत कौर ने कहा कि कुरकुरे, चिप्स, बिस्कुट, नमकीन जैसे बंद पैकेट वाले जंक फूड का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इनमें अधिक नमक, चीनी, तेल और कृत्रिम पदार्थ होते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इनके लगातार सेवन से अनेक गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च करती हैं, लेकिन इन्हे अपने मुनाफे के लालच में लोगों के स्वास्थ्य की जरा भी चिंता नहीं है। उन्होंने लोगों से पैकेट वाले जंक फूड की बजाय घर का ताजा और पौष्टिक भोजन अपनाने तथा बच्चों को भी ऐसी चीजों से दूर रखने की सलाह दी है।

तला-भूना और मीठे का  सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक : डा. किरणदीप कौर

              डॉ. किरणदीप कौर के अनुसार बाजारों में बिकने वाले समोसा, पकौड़े, लड्डू, जलेबी आदि तले-भुने एवं अधिक मीठे खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन शरीर के लिए धीमे जहर की तरह काम करता है। इनमें अत्यधिक तेल, घी, चीनी और कैलोरी होने के कारण मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, फैटी लिवर तथा पाचन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बार-बार गर्म किए गए तेल में बने खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य पर और अधिक प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। उन्होंने लोगों से संतुलित एवं पौष्टिक आहार अपनाने, नियमित व्यायाम करने तथा ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन न करने की परामर्श दिया।

फास्ट फूड की बढ़ती लत बन रही खतरे की घंटी : डॉ. अस्मिता चुघ

बदलती जीवनशैली के साथ फास्ट फूड लोगों की पसंद से आगे बढ़कर लत बनता जा रहा है। डॉ. अस्मिता चुघ ने कहा कि स्वाद, आकर्षक पैकेजिंग, ऑनलाइन डिलीवरी और बड़े स्तर पर होने वाले विज्ञापनों के कारण बच्चे और युवा सबसे अधिक इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।जबकि फास्ट फूड धीरे-धीरे शरीर को खोखला करने वाला धीमा जहर साबित हो रहा है। यदि समय रहते खानपान की आदतों में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां और तेजी से बढ़ेंगी।

Previous Post Next Post